कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) जल्द ही स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली है। कंपनी के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर ने हाल ही में बताया कि अगले 12 महीनों के भीतर या इससे पहले एसईसीएल का आईपीओ लॉन्च हो सकता है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा, जिसमें शेयर बेचकर प्राप्त राशि मूल कंपनी कोल इंडिया को मिलेगी। इससे कंपनी में बेहतर गवर्नेंस, पारदर्शिता और मूल्य सृजन की उम्मीद है।
एसईसीएल कोल इंडिया की सबसे मजबूत सहायक कंपनियों में से एक है, जो कुल उत्पादन का लगभग 23% योगदान देती है। यह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में थर्मल कोल का उत्पादन करती है। हाल ही में बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के सफल आईपीओ ने बाजार में कोल सेक्टर के प्रति जबरदस्त उत्साह दिखाया है। बीसीसीएल का आईपीओ 147 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ और लिस्टिंग पर 95-96% का प्रीमियम मिला। इसी सफलता से उत्साहित होकर एसईसीएल भी इसी तरह के उत्साही रिस्पॉन्स की उम्मीद कर रही है। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 तक लिस्टिंग पूरा करना है।
गेवरा खदान: भारत की सबसे बड़ी, विश्व स्तर पर नंबर 1 बनने की तैयारी
एसईसीएल की सबसे बड़ी ताकत है गेवरा ओपनकास्ट कोल माइन, जो वर्तमान में देश की सबसे बड़ी ओपनकास्ट खदान है। यह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित है और 1981 से संचालित हो रही है। कंपनी का लक्ष्य 2026-27 वित्तीय वर्ष में गेवरा से अकेले 63 मिलियन टन कोल उत्पादन करना है। पर्यावरण मंजूरी पहले से ही 70 मिलियन टन प्रति वर्ष तक विस्तार की मिल चुकी है।
इस वित्तीय वर्ष में गेवरा से 56 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी के पास पर्याप्त उपकरण, ठेके और ग्राहकों से मांग मौजूद है। यदि लक्ष्य हासिल होता है, तो गेवरा एशिया की सबसे बड़ी और संभवतः दुनिया की सबसे बड़ी कोल प्रोड्यूसिंग माइन बन जाएगी। एसईसीएल के सीएमडी हरिश दुहान ने कहा है कि अगले साल तक गेवरा अकेला 63 मिलियन टन उत्पादन कर विश्व में नंबर 1 हो जाएगा।
विस्तार में मुख्य बाधा: भूमि अधिग्रहण
हालांकि उत्पादन बढ़ाने की पूरी तैयारी है, लेकिन मुख्य समस्या भूमि अधिग्रहण में देरी है। स्थानीय विरोध, पुनर्वास की मांगें और प्रशासनिक बाधाएं इस प्रक्रिया को धीमा कर रही हैं। अभी तक गेवरा और निकटवर्ती कुसमुंडा खदान के लिए कुल 264 हेक्टेयर भूमि का भौतिक कब्जा मिल चुका है, जिसमें गेवरा विस्तार के लिए मात्र 70 हेक्टेयर शामिल हैं।
अगले साल तक गेवरा के लिए अतिरिक्त 85-90 हेक्टेयर भूमि हासिल करने की उम्मीद है। एसईसीएल के अधिकारी परथ मुखर्जी ने बताया कि यह अतिरिक्त भूमि मिलने पर उत्पादन क्षमता 63 मिलियन टन तक बढ़ाई जा सकेगी। भूमि की कमी के कारण खदान की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
एसईसीएल के भविष्य की योजनाएं और महत्व
एसईसीएल मिनीरत्न कंपनी है और इसके पास विशाल कोल रिजर्व हैं। कंपनी गैसीफिकेशन और सोलर प्रोजेक्ट्स में विविधीकरण की भी योजना बना रही है। आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग प्रोजेक्ट विस्तार, विविधीकरण और अन्य कार्यों में किया जाएगा। कोल इंडिया की योजना है कि 2030 तक अपनी सभी 8 सहायक कंपनियों को लिस्ट करेगी, जिसमें सीएमपीडीआई पहले आ सकती है क्योंकि यह कम कैपिटल इंटेंसिव है।
एसईसीएल का आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है, क्योंकि कोल सेक्टर में मांग बढ़ रही है और बिजली की जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि, भूमि अधिग्रहण जैसी चुनौतियां उत्पादन लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं।
यह विकास भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एसईसीएल और गेवरा खदान देश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। निवेशक एसईसीएल आईपीओ पर नजर रखें, क्योंकि यह कोल सेक्टर में अगला बड़ा अवसर हो सकता है।
(नोट: यह जानकारी हालिया समाचारों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।)
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