नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा आईपीओ अब करीब आता दिख रहा है। बाजार में ताजा खबरों के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) एनएसई में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी का एक हिस्सा इस आईपीओ के माध्यम से बेचने पर विचार कर रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एलआईसी एनएसई में 10.72% हिस्सेदारी रखती है और जल्द ही इसकी बिक्री की मात्रा व समय पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
यह कदम LIC की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह अपने लंबे समय से निवेशित रणनीतिक शेयरों से मूल्य प्राप्त करने और निवेश पोर्टफोलियो में लिक्विडिटी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। एनएसई का आईपीओ मुख्य रूप से ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा, यानी मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे, जबकि एनएसई द्वारा नई पूंजी जुटाने की मात्रा बहुत कम होगी।
NSE IPO की ताजा अपडेट्स क्या हैं?
फरवरी 2026 की शुरुआत में एनएसई के बोर्ड ने आईपीओ को मंजूरी दे दी है और एक कमिटी का गठन किया गया है जो इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी। सेबी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिलने के बाद अब ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अनुमान है कि आईपीओ अगले 6 से 7 महीनों में लॉन्च हो सकता है, यानी 2026 के मध्य तक।
आईपीओ का साइज करीब 2.5 बिलियन डॉलर (लगभग 20,000-23,000 करोड़ रुपये) रहने की उम्मीद है। इसमें कंपनी की इक्विटी का 4% से 4.5% हिस्सा बेचा जाएगा। एनएसई की मजबूत वित्तीय स्थिति, बाजार में दबदबा और अच्छी लाभप्रदता के कारण यह आईपीओ निवेशकों के बीच काफी चर्चित है। यह भारत के कैपिटल मार्केट में सबसे बड़े लिस्टिंग में से एक बन सकता है।
LIC की हिस्सेदारी और बिक्री की योजना
- एलआईसी की मौजूदा हिस्सेदारी — एनएसई में 10.72% (सबसे बड़े गैर-प्रमोटर शेयरधारकों में से एक)।
- बिक्री का तरीका — अलग से सेकेंडरी ट्रांजेक्शन की बजाय एनएसई के आईपीओ के जरिए।
- उद्देश्य — निवेशों को मुद्रीकृत करना, पोर्टफोलियो में लिक्विडिटी बढ़ाना और लंबे समय से रखे गए शेयरों से लाभ कमाना।
- अन्य प्रमुख शेयरधारक जैसे टेमासेक होल्डिंग्स (लगभग 4.5%), एसबीआई कैपिटल मार्केट्स (4.33%), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (3.23%) भी इस ऑफर में हिस्सा बेच सकते हैं।
एलआईसी और एनएसई की ओर से अभी तक इस प्रस्तावित बिक्री पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, बाजार सूत्रों और रिपोर्ट्स में यह बात लगातार सामने आ रही है कि एलआईसी आईपीओ के जरिए आंशिक एग्जिट लेगी।
NSE IPO क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
NSE भारत का सबसे बड़ा इक्विटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी बहुत मजबूत है। 2016-17 से ही इसकी पब्लिक लिस्टिंग की कोशिश चल रही थी, लेकिन को-लोकेशन मामले में सेबी की कार्रवाई और 1,388 करोड़ रुपये के सेटलमेंट के कारण देरी हुई। अब यह बाधा दूर हो गई है, जिससे आईपीओ की राह साफ हो गई है।
यह आईपीओ न केवल NSE के लिए मील का पत्थर होगा, बल्कि सरकारी और संस्थागत निवेशकों के लिए भी संपत्ति मुद्रीकरण का बड़ा अवसर बनेगा। निवेशक लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि NSE की मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ और ग्रोथ पोटेंशियल इसे आकर्षक बनाता है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
यदि आप स्टॉक मार्केट या आईपीओ में रुचि रखते हैं, तो NSE IPO एक बड़ा इवेंट होगा। एलआईसी जैसी दिग्गज संस्था की भागीदारी से इसमें निवेशकों का भरोसा और बढ़ेगा। हालांकि, अंतिम डिटेल्स जैसे इश्यू साइज, प्राइस बैंड और आवंटन नियम सेबी की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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(नोट: यह जानकारी विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों जैसे जी बिज, ब्लूमबर्ग, इकोनॉमिक टाइम्स आदि से संकलित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।)
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वरुण सिंह IPOAlert.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट एडिटर हैं। वे IPO और शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी को research-based, factual और reader-friendly तरीके से प्रस्तुत करने पर फोकस करते हैं।IPOAlert.in का उद्देश्य निवेशकों को शैक्षणिक और सूचना आधारित कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे वे बाजार को बेहतर तरीके से समझ सकें।