भारत की चर्चित हॉस्पिटैलिटी कंपनी OYO की मूल कंपनी ओरावेल स्टेज़ लिमिटेड ने आखिरकार अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP-I) 29 जून 2026 को सेबी के पास दाखिल कर दिया है। यह दस्तावेज़ बताता है कि कंपनी अब वाकई अपने बहुप्रतीक्षित IPO की ओर ठोस कदम बढ़ा चुकी है। यह 100 प्रतिशत बुक बिल्ट इश्यू होगा।
OYO की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही — एक छोटे से कमरे के बिजनेस से शुरू होकर आज दुनिया के 35 से ज्यादा देशों में फैला हॉस्पिटैलिटी साम्राज्य बनना। अब यह कंपनी अपनी इस यात्रा का अगला अध्याय शेयर बाजार में लिखने जा रही है।
OYO IPO: इश्यू का आकार और संरचना
ओरावेल स्टेज़ इस IPO के जरिए कुल 66,500 मिलियन रुपये यानी करीब 6,650 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा — यानी इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। हर शेयर का फेस वैल्यू 1 रुपये रखा गया है।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी फिलहाल प्राइस बैंड घोषित नहीं कर सकी है क्योंकि यह दस्तावेज़ अभी अपडेटेड ड्राफ्ट स्तर पर है। प्राइस बैंड और बिड लॉट की जानकारी आगे चलकर रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस फाइल करते समय सामने आएगी।
कंपनी ने यह भी बताया है कि RoC के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने से पहले वह 13,300 मिलियन रुपये यानी करीब 1,330 करोड़ रुपये तक का प्री-IPO प्लेसमेंट भी कर सकती है। अगर यह प्लेसमेंट होता है तो फ्रेश इश्यू का आकार उतनी ही राशि से घट जाएगा।
OYO क्या करती है और कैसे कमाती है
ओरावेल स्टेज़ मूलतः एक टेक्नोलॉजी-संचालित हॉस्पिटैलिटी प्लेटफॉर्म है, जो पैट्रन्स (यानी होटल और प्रॉपर्टी के मालिकों) को कस्टमर्स से जोड़ती है। कंपनी खुद होटल नहीं खरीदती — यह एक एसेट-लाइट मॉडल पर काम करती है, जहां प्रॉपर्टी का निवेश और खर्च मालिक उठाते हैं, जबकि OYO टेक्नोलॉजी, ब्रांडिंग और बुकिंग का जिम्मा संभालती है।
कंपनी का कारोबार तीन मुख्य हिस्सों में बंटा है। पहला है होटल्स वर्टिकल, जिसमें Sunday, Townhouse, Palette, OYO, Motel 6 और Studio 6 जैसे ब्रांड्स के तहत होटल शामिल हैं और यह भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व में फैला है। दूसरा है होम्स वर्टिकल, जिसमें यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में Belvilla, DanCenter और Checkmyguest जैसे ब्रांड्स के तहत वेकेशन होम्स आते हैं। तीसरा है लिस्टिंग्स वर्टिकल, जिसमें यूरोप में फिक्स्ड सब्सक्रिप्शन फीस पर प्रॉपर्टीज़ लिस्ट होती हैं।
इसके अलावा कंपनी वेडिंग वेन्यू (Weddingz), को-वर्किंग स्पेस (Workspaces), टूर्स, इवेंट्स और इंश्योरेंस जैसी सेवाएं भी देती है।
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी 35 से अधिक देशों में 24,303 होटल स्टोरफ्रंट्स, 1,24,668 होम स्टोरफ्रंट्स और 1,44,583 लिस्टिंग स्टोरफ्रंट्स के साथ मौजूद है। 2012 में स्थापना के बाद से कंपनी ने अब तक करीब 11.94 करोड़ अलग-अलग ग्राहकों को सेवा दी है। भारत में होटल स्टोरफ्रंट्स की संख्या के हिसाब से OYO पहले स्थान पर है।
कंपनी के वित्तीय आंकड़े
ओरावेल स्टेज़ का वित्तीय सफर पिछले कुछ वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन हाल के समय में कंपनी ने मुनाफे की राह पकड़ ली है।
वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का राजस्व 546.39 करोड़ रुपये था, जबकि उसी साल कंपनी को 128.65 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2024 में राजस्व बढ़कर 538.88 करोड़ रुपये रहा (हल्की गिरावट के साथ) लेकिन कंपनी ने 22.96 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। वित्त वर्ष 2025 में राजस्व उछलकर 625.28 करोड़ रुपये पर पहुंचा और मुनाफा भी बढ़कर 24.48 करोड़ रुपये हो गया।
सबसे उत्साहजनक आंकड़ा 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों का है, जिसमें कंपनी ने 694.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया और मुनाफा बढ़कर 74.83 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी कंपनी की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है।
कुल आय (टोटल इनकम) की बात करें तो यह वित्त वर्ष 2023 में 560.17 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 632.59 करोड़ रुपये और 9M FY26 में 716.63 करोड़ रुपये तक जा पहुंची है।
IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां होगा
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जुटाई गई रकम का सबसे बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च होगा। कंपनी अपनी सिंगापुर स्थित सब्सिडियरी ओरावेल स्टेज़ सिंगापुर Pte. Ltd. में निवेश करेगी, ताकि वह अपने टर्म लोन बी (TLB) कर्ज का आंशिक या पूर्ण भुगतान कर सके। इसके लिए करीब 49,875 मिलियन रुपये यानी लगभग 4,987.50 करोड़ रुपये का इस्तेमाल प्रस्तावित है।
31 मई 2026 तक कंपनी पर इस TLB कर्ज के तहत कुल 77,569.59 मिलियन रुपये यानी करीब 7,756.96 करोड़ रुपये बकाया हैं, और IPO की रकम से इसका 64.30 प्रतिशत हिस्सा चुकाया जाना प्रस्तावित है। बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखी जाएगी।
यह कर्ज मूल रूप से कंपनी के अधिग्रहणों और पुराने लोन के रीफाइनेंसिंग के लिए लिया गया था, जिसमें G6 हॉस्पिटैलिटी के अधिग्रहण से जुड़ा भुगतान भी शामिल है।
प्रमोटर्स और मालिकाना हक
कंपनी के प्रमोटर्स में रितेश अग्रवाल, RA हॉस्पिटैलिटी होल्डिंग्स (केमैन) और SVF इंडिया होल्डिंग्स (केमैन) लिमिटेड शामिल हैं। रितेश अग्रवाल इस कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन हैं और RA हॉस्पिटैलिटी होल्डिंग्स में वे 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अप्रत्यक्ष रूप से रखते हैं।
कंपनी के दस्तावेजों के अनुसार रितेश अग्रवाल की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी समय के साथ बदलती रही है। हाल के वर्षों में उनकी हिस्सेदारी करीब 28 से 39 प्रतिशत के बीच रही है, जो कंपनी में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाती है।
वैश्विक पहुंच और बाजार में स्थिति
OYO का कारोबार पूरी तरह से भारत-केंद्रित नहीं रहा। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के राजस्व का बड़ा हिस्सा भारत के बाहर से आता है। नौ महीनों (दिसंबर 2025 तक) में कंपनी के राजस्व का करीब 74.70 प्रतिशत हिस्सा भारत के बाहर से जनरेट हुआ, जबकि भारत से सिर्फ 25.30 प्रतिशत हिस्सा आया।
सेंसर टावर के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक OYO दुनिया का आठवां सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला होटल बुकिंग ऐप है। कंपनी अमेरिका के इकोनॉमी होटल सेगमेंट और यूरोप के होम्स सेगमेंट में भी मजबूत पकड़ रखती है।
कंपनी का “इंडिया फॉर द वर्ल्ड” मॉडल खास तौर पर ध्यान खींचता है — यानी भारत में विकसित टेक्नोलॉजी और अनुभव का इस्तेमाल करके दुनिया भर के बाजारों में विस्तार करना। दिसंबर 2025 तक कंपनी के 76.12 प्रतिशत कर्मचारी भारत में ही कार्यरत हैं, खासकर इंजीनियरिंग टीम।
कंपनी की रणनीति में बदलाव
शुरुआत में OYO इकोनॉमी होटल सेगमेंट को व्यवस्थित करने पर केंद्रित थी, लेकिन अब कंपनी ने अपना दायरा बढ़ाते हुए कंपनी-संचालित (कंपनी-सर्विस्ड) होटल स्टोरफ्रंट्स में भी कदम रखा है, जो Sunday, Townhouse, Clubhouse और Palette जैसे प्रीमियम ब्रांड्स के तहत आते हैं। मई 2026 से कंपनी ने भारत में इन्हें “OYO-Serviced” नाम से बाजार में पेश करना शुरू किया है।
भारत में कंपनी-संचालित होटल स्टोरफ्रंट्स का योगदान 9M FY26 में कुल GBV का करीब 49.29 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024 में महज 2.61 प्रतिशत था। यह दिखाता है कि कंपनी अब प्रीमियम और बेहतर नियंत्रण वाले मॉडल की तरफ तेजी से बढ़ रही है।
जोखिम जो निवेशकों को जानना जरूरी
कोई भी IPO जोखिम-मुक्त नहीं होता, और ओरावेल स्टेज़ के दस्तावेज़ में भी कई जोखिम कारक बताए गए हैं।
कंपनी का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने की योजना से जुड़ा है, और टर्म लोन बी से जुड़ी शर्तें जटिल हैं — समय से पहले इसे चुकाने पर मेक-व्होल प्रीमियम जैसी अतिरिक्त लागत आ सकती है, जिसका असर कंपनी के नकदी प्रवाह पर पड़ सकता है।
इसके अलावा कंपनी अपने संस्थापक और चेयरमैन रितेश अग्रवाल पर काफी हद तक निर्भर है, जो प्रबंधन टीम का नेतृत्व करते हैं। प्रबंधन के किसी प्रमुख व्यक्ति के अचानक हट जाने से कंपनी के परिचालन पर असर पड़ सकता है।
कंपनी का राजस्व का बड़ा हिस्सा भारत के बाहर से आता है, जिसका मतलब है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, मुद्रा विनिमय दरों और अलग-अलग देशों के नियमों में बदलाव का सीधा असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है
OYO भारत के सबसे चर्चित स्टार्टअप्स में से एक रही है और इसका IPO बाजार में काफी दिलचस्पी पैदा कर सकता है। कंपनी ने हाल के समय में घाटे से मुनाफे की तरफ ठोस कदम बढ़ाए हैं और राजस्व में भी लगातार बढ़ोतरी दिख रही है।
हालांकि प्राइस बैंड अभी घोषित नहीं हुआ है, इसलिए वैल्यूएशन को लेकर अंतिम राय बनाना जल्दबाजी होगी। निवेशकों को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अंतिम संस्करण और प्राइस बैंड की घोषणा का इंतजार करना चाहिए, ताकि वे कंपनी के पूरे वित्तीय ढांचे और जोखिमों को बेहतर ढंग से समझकर निवेश का फैसला ले सकें।
स्रोत: ओरावेल स्टेज़ लिमिटेड का अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस-I (दिनांक 29 जून 2026), सेबी के पास दाखिल सार्वजनिक दस्तावेज़
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है। प्राइस बैंड और अंतिम इश्यू विवरण अभी घोषित नहीं हुए हैं। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है — निवेश से पहले अंतिम RHP पढ़ें और योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
Read Also: Knack Packaging IPO 2026: GMP, Price Band, Review, Lot Size, Dates और निवेश करें या नहीं?
वरुण सिंह IPOAlert.in के संस्थापक और मुख्य कंटेंट एडिटर हैं। वे IPO और शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी को research-based, factual और reader-friendly तरीके से प्रस्तुत करने पर फोकस करते हैं।IPOAlert.in का उद्देश्य निवेशकों को शैक्षणिक और सूचना आधारित कंटेंट उपलब्ध कराना है, जिससे वे बाजार को बेहतर तरीके से समझ सकें।