NSE IPO Latest News: 10 साल की देरी के बाद ट्रैक पर लौटा, अनलिस्टेड शेयर 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचे

भारत की सबसे बड़ी स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का आईपीओ लंबे इंतजार के बाद अब गति पकड़ रहा है। करीब एक दशक की देरी और नियामकीय बाधाओं के बाद, एनएसई ने अपने बोर्ड से आईपीओ को मंजूरी दिलाई है। यह खबर निवेशकों के लिए बड़ी उम्मीद जगाती है, क्योंकि एनएसई का लिस्टिंग भारत के पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा।

NSE IPO: देरी के पीछे मुख्य कारण क्या थे?

एनएसई ने 2016 में पहली बार ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल किए थे, जिसमें करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य था। लेकिन को-लोकेशन घोटाले और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों के कारण सेबी ने मंजूरी रोक दी। इस मामले में कुछ ब्रोकर्स को ट्रेडिंग सिस्टम में preferential एक्सेस मिलने के आरोप लगे, जिससे कानूनी लड़ाई चली और आईपीओ फंस गया। दिल्ली हाई कोर्ट तक मामला पहुंचा, और सालों तक प्रक्रिया रुकी रही।

अब क्या हुआ? ताजा अपडेट

2025 में एनएसई ने सेबी के साथ लंबे लंबित मामलों को सेटल कर लिया। कंपनी ने करीब 1,400 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति जताई (जिसमें पहले से प्रावधान किए गए 1,297 करोड़ और 100 करोड़ का डिपॉजिट शामिल है)। इस सेटलमेंट के बाद सेबी ने नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया, जिससे रास्ता साफ हो गया।

6 फरवरी 2026 को एनएसई बोर्ड ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आईपीओ लाने की मंजूरी दी। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे, कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। एनएसई ने कहा, “कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल के माध्यम से आईपीओ करने पर विचार और मंजूरी दी गई है।”

Rothschild की नियुक्ति: प्रक्रिया तेज

12 फरवरी 2026 को एनएसई ने Rothschild & Co को इंडिपेंडेंट एडवाइजर नियुक्त किया। यह कंपनी लीड बैंकर, लीगल काउंसल और अन्य इंटरमीडियर्स चुनने में मदद करेगी। DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) तैयार करने में 3-4 महीने लग सकते हैं। निवेश बैंकों से पिच जल्द आमंत्रित होंगी।

संभावित आईपीओ साइज 22,500-24,500 करोड़ रुपये तक अनुमानित है (4-4.5% इक्विटी डाइल्यूशन पर आधारित), और लिस्टिंग 2026 के अंत तक हो सकती है, बाजार की स्थिति और मंजूरियों पर निर्भर।

अनलिस्टेड शेयरों में तेजी

बोर्ड अप्रूवल और Q3 FY26 के नतीजों के बाद अनलिस्टेड एनएसई शेयरों में जबरदस्त उछाल आया। हालिया ट्रेडिंग में प्राइस करीब 2,075-2,150 रुपये प्रति शेयर पहुंच गया, जो 6 महीने का उच्चतम स्तर है। कुछ प्लेटफॉर्म्स पर 2,040-2,150 के आसपास ट्रेड हो रहा है। इससे इम्प्लाइड मार्केट कैप करीब 5.13-5.32 लाख करोड़ रुपये बनता है। पिछले कुछ महीनों में प्राइस 1,625 से 2,400 रुपये तक घूम चुका है।

Q3 FY26 वित्तीय नतीजे

एनएसई के दिसंबर तिमाही नतीजों में कंसॉलिडेटेड PAT 2,408 करोड़ रुपये रहा (YoY 37% कम, लेकिन QoQ 15% ज्यादा)। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 3,925 करोड़ (YoY 9% कम), लेकिन टोटल इनकम QoQ 6% बढ़कर 4,395 करोड़ हुई।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

एनएसई भारत का प्रमुख इक्विटी और डेरिवेटिव एक्सचेंज है, जो 1994 से काम कर रहा है। इसका लिस्टिंग बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर में पब्लिक पार्टिसिपेशन बढ़ाएगा और गवर्नेंस चैप्टर को क्लोज करेगा। अनलिस्टेड मार्केट में निवेशक पहले से मुनाफा कमा चुके हैं, लेकिन ऑफिशियल आईपीओ में वैल्यूएशन और मार्केट सेंटिमेंट पर नजर रखें।

यह विकास भारतीय पूंजी बाजार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। अपडेट्स के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।

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