Advanta Enterprises IPO 2026: UPL की सब्सिडियरी ने सेबी के पास ड्राफ्ट फाइल किया, जानिए पूरी डिटेल्स

Advanta Enterprises IPO 2026: नमस्कार दोस्तों! अगर आप शेयर बाजार में रुचि रखते हैं और कृषि क्षेत्र की कंपनियों पर नजर रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यूपीएल लिमिटेड की सब्सिडियरी एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने हाल ही में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा किया है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) पर आधारित है, जिसमें कोई नई शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। आइए, हम इस आईपीओ की पूरी जानकारी को सरल भाषा में समझते हैं, साथ ही कुछ अतिरिक्त महत्वपूर्ण डिटेल्स जो निवेशकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।

Advanta Enterprises कौन है? कंपनी का बैकग्राउंड

एडवांटा एंटरप्राइजेज एक ग्लोबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस कंपनी है, जो मुख्य रूप से हाइब्रिड बीजों और फसल-संबंधित उत्पादों पर फोकस करती है। सितंबर 2025 तक, कंपनी के पोर्टफोलियो में 21 ब्रीडिंग फसलों और 19 कमर्शियल फसलों में 900 से ज्यादा हाइब्रिड बीज वैरायटी शामिल हैं। कंपनी भारत सहित करीब 74 देशों में अपने उत्पाद बेचती है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति रखती है।

यूपीएल लिमिटेड, जो एडवांटा की प्रमोटर कंपनी है, खुद एक जानी-मानी एग्रीकेमिकल कंपनी है और भारतीय स्टॉक मार्केट पर लिस्टेड है। यूपीएल के पास एडवांटा में 64% से ज्यादा हिस्सेदारी है, जबकि यूपीएल कॉर्पोरेशन के पास लगभग 14% स्टेक है। एडवांटा की स्थापना कृषि उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से हुई है, और यह किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराकर फसल की पैदावार में सुधार लाने पर जोर देती है। भारतीय कृषि क्षेत्र में, जहां बीज उद्योग तेजी से बढ़ रहा है (2025 में बाजार का आकार लगभग 20 बिलियन डॉलर का अनुमान है), एडवांटा जैसी कंपनियां जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी की चुनौतियों का सामना करने में मदद कर रही हैं।

अगर आप निवेशक हैं, तो ध्यान दें कि एडवांटा का फोकस सस्टेनेबल एग्रीकल्चर पर है, जो आने वाले सालों में ग्लोबल ट्रेंड्स जैसे ऑर्गेनिक फार्मिंग और क्लाइमेट-स्मार्ट क्रॉप्स के साथ जुड़ता है। यह कंपनी न केवल भारत में बल्कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में विस्तार कर रही है।

Advanta Enterprises IPO की मुख्य डिटेल्स

Advanta Enterprises का आईपीओ 19 जनवरी 2026 को सेबी के पास फाइल किया गया है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है, जिसमें कुल 3.61 करोड़ इक्विटी शेयर (36,105,578 शेयर) बेचे जाएंगे। हर शेयर का फेस वैल्यू ₹1 है। इसमें कोई फ्रेश इश्यू नहीं है, यानी कंपनी को आईपीओ से कोई फंड नहीं मिलेगा – सारा पैसा बेचने वाले शेयरधारकों को जाएगा।

  • शेयरों का ब्रेकडाउन:
    • यूपीएल लिमिटेड 2.81 करोड़ शेयर (28,107,578 शेयर) बेचेगी।
    • अन्य विक्रेता: मेलवुड होल्डिंग्स II Pte Ltd और KIA EBT स्कीम 2।
  • मर्चेंट बैंकर्स: आईपीओ को मैनेज करने के लिए JM फाइनेंशियल, एक्सिस कैपिटल, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज और मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी को नियुक्त किया गया है। ये सभी बड़े नाम हैं, जो आईपीओ की विश्वसनीयता बढ़ाते हैं।

ओएफएस क्या होता है? सरल शब्दों में, यह मौजूदा शेयरधारकों द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने का तरीका है। इससे कंपनी को नया कैपिटल नहीं मिलता, लेकिन यह प्रमोटर्स को लिक्विडिटी प्रदान करता है और कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग का फायदा मिलता है। निवेशकों के लिए, यह एक मौका है जहां वे एक स्थापित कंपनी में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं बिना कंपनी के विस्तार प्लान पर निर्भर हुए।

Advanta Enterprises: कंपनी की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

Advanta Enterprises ने हाल के वर्षों में मजबूत ग्रोथ दिखाई है। यहां कुछ प्रमुख आंकड़े:

  • FY 2024: रेवेन्यू ₹5,119 करोड़; नेट प्रॉफिट ₹800 करोड़।
  • FY 2025: रेवेन्यू ₹5,685 करोड़; नेट प्रॉफिट ₹921 करोड़।
  • FY 2026 (अप्रैल-सितंबर 2025 हाफ-ईयर): रेवेन्यू ₹3,141 करोड़; नेट प्रॉफिट ₹540 करोड़।

ये आंकड़े कंपनी की स्थिरता और ग्रोथ को दर्शाते हैं। कृषि क्षेत्र में, जहां मौसम और कमोडिटी प्राइसेज का प्रभाव पड़ता है, Advanta Enterprises ने रेवेन्यू में साल-दर-साल 11% की बढ़ोतरी दर्ज की है। यह कंपनी की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आर&डी) पर निवेश का नतीजा है, जहां वे नई हाइब्रिड वैरायटी डेवलप करती हैं। भारतीय बाजार में एग्री स्टॉक्स जैसे यूपीएल (जो 19 जनवरी 2026 को BSE पर ₹785.50 पर बंद हुआ, पिछले साल 52.78% ऊपर) ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जो अद्वंता के लिए सकारात्मक संकेत है।

Advanta Enterprises IPO का उद्देश्य और फायदे

इस आईपीओ का मुख्य उद्देश्य प्रमोटर्स और निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका देना है। यूपीएल, जो पहले से ही लिस्टेड है, अपनी सब्सिडियरी को अलग से लिस्ट करके वैल्यू अनलॉक करना चाहती है। निवेशकों के लिए, यह एक अवसर है जहां वे कृषि बीज सेक्टर में एंट्री कर सकते हैं, जो भारत की जीडीपी में 18% योगदान देता है।

अतिरिक्त टिप्स निवेशकों के लिए:

  • मार्केट ट्रेंड्स: भारतीय बीज बाजार 2025-2030 तक 8-10% CAGR से बढ़ने की उम्मीद है, सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान और एग्री-एक्सपोर्ट पॉलिसी के कारण।
  • रिस्क फैक्टर्स: कृषि सेक्टर में मौसम, पेस्टिसाइड रेगुलेशंस और ग्लोबल ट्रेड वॉर का जोखिम रहता है। डीआरएचपी में इनका जिक्र है, इसलिए निवेश से पहले पढ़ें।
  • कैसे अप्लाई करें?: आईपीओ अप्रूवल के बाद, आप डीमैट अकाउंट के जरिए बिड कर सकते हैं। सेबी की मंजूरी मिलने में 2-3 महीने लग सकते हैं।
  • सलाह: हमेशा फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। पिछले साल एग्री आईपीओ जैसे Kaveri Seed ने अच्छा रिटर्न दिया, लेकिन बाजार वोलेटाइल है।

यह आईपीओ कृषि क्षेत्र में निवेशकों के लिए एक नया द्वार खोल सकता है। अगर आपके पास कोई सवाल है, तो कमेंट्स में बताएं। स्टॉक मार्केट में निवेश जोखिम भरा होता है, सोच-समझकर फैसला लें!

(नोट: यह लेख उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और निवेश सलाह नहीं है।)

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FAQs

Q: Advanta Enterprises IPO क्या है और यह कब फाइल किया गया?

A: Advanta Enterprises (UPL की सब्सिडियरी) ने 19 जनवरी 2026 को SEBI के पास DRHP फाइल किया है। यह पूरी तरह से Offer for Sale (OFS) है, जिसमें 3.61 करोड़ इक्विटी शेयर (फेस वैल्यू ₹1) बेचे जाएंगे। कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा, सारा पैसा मौजूदा शेयरधारकों (मुख्य रूप से UPL) को जाएगा।

Q: Advanta Enterprises कंपनी क्या करती है और इसका बिजनेस कैसा है?

A: Advanta Enterprises एक ग्लोबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस कंपनी है, जो हाइब्रिड बीजों पर फोकस करती है। सितंबर 2025 तक इसके पास 21 ब्रीडिंग फसलों में 900+ हाइब्रिड वैरायटी हैं और यह 74 देशों में ऑपरेट करती है। FY25 में रेवेन्यू ₹5,685 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹921 करोड़ रहा, जो मजबूत ग्रोथ दिखाता है।

Q: इस IPO से निवेशकों को क्या फायदा या रिस्क हो सकता है?

A: यह IPO कृषि बीज सेक्टर (जो 8-10% CAGR से बढ़ रहा है) में एंट्री का मौका देता है, खासकर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर ट्रेंड के साथ। फायदे: स्थापित कंपनी, UPL बैकिंग, अच्छी फाइनेंशियल ग्रोथ। रिस्क: मौसम निर्भरता, रेगुलेटरी चेंजेस, ग्लोबल ट्रेड इश्यूज।

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